शायर हूँ साहब 'अल्फ़ाज़ो' की मिट्टी से 'महफ़िलों' को सजाता हूँ।।
कुछ को 'बेकार' ......कुछ को 'कलाकार' नज़र आता हूँ।।
अभय बलरामपुरी

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