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रात का आलम दर्द दे जुदाई ।।अभय बलरामपुरी

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हमने जो की थी मोहब्बत आज भी है।। तेरी जुल्फों की शाये की चाहत आज भी है।। रात कटती है आज भी ख्यालों मे तेरे।। दीवानों सी वो मेरी हालत आज भी है।। किसी और के तस्बुर उठती नही निगाहें।। बेईमान आँखों मे थोड़ी सी शराफत आज भी है।। चाह के इक बार चाहे फिर छोड़ देना तुम।। दिल तोड तुझे जाने की इजाजत आज भी है।। @@@आकाशवानी@@@
यूं तो गुज़र रहा है, हर इक पल खुशी के साथ, फिर भी कोई कमी सी है, क्यों ज़िंदगी के साथ, रिश्ते वफाये दोस्ती, सब कुछ तो पास है, क्या बात है पता नही, दिल क्यों उदास है, हर लम्हा है हसीन, नई दिलकशी के साथ, चाहत भी है सुकून भी है दिल्बरी भी है, आखों में खवाब भी है, लबो पर हसी भी है, दिल को नही है कोई, शिकायत किसी के साथ, सोचा था जैसा वैसा ही जीवन तो है मगर, अब और किस तलाश में बैचैन है नज़र, कुदरत तो मेहरबान है, दरयादिली के साथ
प्यार का पहला खत लिखने में वक़्त तो लगता है... नये परिंदो को उड़ने में वक़्त तो लगता है.. जिस्म की बात नही थी उनके दिल तक जाना था.... लंबी दूरी तय करने में वक़्त तो लगता है... उसने यू कह दिया राह चलते दोस्त बनते नही सही कहा उसने दोस्त बनाने  मे वक्त लगता है हम तो नादान थे ,अभय ,दिल दे बैठे उसको हमे क्या पता था दिल देने मे भी वक्त लगता है गाँठ अगर लग जाये तो फिर रिश्ते हो या डोरी... लाख करे कोशिश खुलने में वक़्त तो लगता है... हमने इलाज-ए-जख्म-ए-दिल तो ढूँढ लिया लेकिन... गहरे ज़ख़्मो को भरने में वक़्त तो लगता है...