हाँ मैने प्यार किया धीरे,धीरे दिल बे करार किया धीरे ,धीरे अपनो को खुद से दूर किया खुद को खुद से मजबूर किया उनके ख्वाबों को पिरोया धीरे, धीरे उनकी मोहब्बत भी कैसी,मोहब्बत है उसने इनकार किया धीरे ,धीरे न जाने क्यों याद आयी आज उनकी हम बेकरार हुए मिलने को उनसे वो न आए मिलने मुझसे ऐ"अभय" मुझको गुमराह किया धीरे, धीरे दिल की दरिया मे सेमेटे उनकी यादे उनकी यादो को यादो से जुदा किया धीरे धीरे दिल तो रोया है बहुत,उनकी मोहब्बत मे दिल को बहलायेंगे अब धीरे धीरे हाँ मैंने प्यार किया धीरे धीरे अभय बलरामपुरी
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Showing posts from December, 2017
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मकड़ी जैसे मत उलझो, तुम गम के ताने बाने में, तितली जैसे रंग बिखेरो, हँस कर इस ज़माने में,।। जलते है जो जलने दो, अपना क्या जाता है जलाने मै, तितली जैसे रंग बिखेरो, हँस कर इस ज़माने में,।। हॅस कर पार करो तुम , नय्या बीच फसी मझधारे मे, जो है दरिया मै बैठे, उनको पार लगाने मै, तितली जैसे रंग बिखेरो, हँस कर इस ज़माने में,।। अभय बलरामपुरी
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मै यादो का किस्सा खोलू तो कुछ दोस्त बहुत याद आते है,,।। मै गुजरे पल को सोचू तो,,कुछ दोस्त बहुत याद आते है।। अब जाने कौन सी नगरी मै,,आबाद है जाके मुद्दत से,,।। मै देर रात तक जागू तो,,कुछ दोस्त बहुत याद आते है।। कुछ बाते थी फूलो जैसी,,कुछ लहजे खुशबू जैसे थे,,।। मै शहरे चमन मै टहले तो,, कुछ दोस्त बहुत याद आते है।।