अपने देश को किसकी लगी नजर।
मनुवाद के जुल्मों से झुलसें है दीवारों दर।
चीख-2कर यही कह रहा है सहारनपुर।
देश को किसकी लगी नजर।।
जिस देश मे प्यार का नगमा हर इक होठ पे पलता था।
जिस देश मे संविधान से कुछ चलता था।
जिस भारत को वीरो ने पाला पोसा था।
जिस देश के सविधान पे अब्दुल कलाम को बडा भरोसा था।।
जहाँ 1992 के दग़ो अमन बचा था जिन्दा।
जिस मिट्टी पर कभी तिरंगा नही हुआ सरमिन्दा।
उस देश मे आज मनुवादी जलवाते है दलितो के घर।
देश को किसकी लगी नजर ।।
अभय बलरामपुरी
7379693968
मनुवाद के जुल्मों से झुलसें है दीवारों दर।
चीख-2कर यही कह रहा है सहारनपुर।
देश को किसकी लगी नजर।।
जिस देश मे प्यार का नगमा हर इक होठ पे पलता था।
जिस देश मे संविधान से कुछ चलता था।
जिस भारत को वीरो ने पाला पोसा था।
जिस देश के सविधान पे अब्दुल कलाम को बडा भरोसा था।।
जहाँ 1992 के दग़ो अमन बचा था जिन्दा।
जिस मिट्टी पर कभी तिरंगा नही हुआ सरमिन्दा।
उस देश मे आज मनुवादी जलवाते है दलितो के घर।
देश को किसकी लगी नजर ।।
अभय बलरामपुरी
7379693968
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